हर पल जब वो रहती थी नजदीक मेरे ,
वो दिन अब कल हो गया है .
वो लम्हे जब हाथ में कोई हाथ था मेरे,
वो प्यारा पल कही खो गया है .
तन्हाइयां जब डरती थी हमें ,
और जुदाई के सपने डरावने थे .
आज तन्हाईयों से मुहब्बत हुई है ,
और अकेलापन हमसफ़र हो गया है.
वो दिन जब कोई हमदम था साथ में ,
वो लम्हा अब कल हो गया है.
उठती है टीस आज भी मन में,
की क्यों नजदीकियां दूरिया बनी है,
क्यों वो वहा और हम यहाँ है .
क्यों रब के और मेरे बीच ठनी है.
अब दिल रोता है बड़ा दर्द होता है,
उजाला भी मेरे लिए अँधेरा हो गया है.
जब उनकी यादों की जगह वो साथ होते थे ,
वो सुनहरा पल कही खो गया है.
और वो दिन अब कल हो गया है.....

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