सुना बहुत था वहा चलती है मुहब्बतों की गोलिया .
गए वहा तो खड़ी मिली थी आशिकों की टोलिया.
वहां प्रेम की तलवारों के बीच कई लडकिया घायल थी.
उन्ही में प्रियंका , ऐश्वर्या और तेरी गर्लफ्रेंड पायल थी.
अपने समय में आशिकों का वही एक ठिकाना था.
वहा जाना तो कन्याओ के प्रेम में मर जाना था.
उनमे से तो कुछ हमें सपनो में घेरा करती थी .
ना जाने किस बात की खातिर हम पर वो यूँ मरती थी .
जब स्वप्न ख़त्म हुआ तो सत्य सामने आया है.
दीप्ती को मेसेज करने के लिए मेसेज पैक डलवाया है.
फ़ोन किया ये सोचकर की लव यु की गोलियां चलाएंगे
पता किसे था उस और से अंकल की गालियाँ खायेंगे.
चली चांदनी कॉलेज तो हमको भी पीछे जाना था.
नोट्स कॉपी करना तो हमारा एक बहाना था.
सोचा था दो सीटियाँ मारकर उसे इम्प्रेस कर पायेंगे.
पता किसे था भरी कॉलेज में थप्पड़ उसकी खायेंगे.
उसी रात जब सपनो की दुनिया में हम खोये थे.
वही हमने नेहा के साथ प्रेम के बीज बोये थे.
वह पटाखा होंडा की एक्टिवा गजब चलती थी.
चलते हुए हर लड़के को घायल कर जाती थी.
लगे सोचने मन ही मन आखिर उसको पाना है.
पटाने की खातिर अच्छी सी बाईक एक लाना है.
लगी किक्क भरवाया पेट्रोल और हम निकल दिए .
बाईक लेकर उस बाला की खोज में हम चल दिए.
थोडा आगे चले ही थी गाडी उसकी पड़ी मिली.
देखा तो जाना की एक लड़के के साथ वो खड़ी मिली.
सीधे गए बन्दे का कल्लर पकड़ा और पूछा तू कौन है .
निकला वो भाई और हुई पिटाई की आज तक हम मौन है.
उस दिन से अब तक हमारे ख्वाब ख़ाली है.
लडकिया तो जैसे हमारे लिए ज़हर की प्याली है.
बने ब्रह्मचारी इतनी पिटाई से बस यही ठिकाना है.
बालाओ से भरा हुआ हमारा यही फ़साना है.
हम पैदा हुए कुंवारे और कुंवारे ही मरजाना है .
बालाओ से भरा हुआ हमारा ही फ़साना है .