बचपन से सुनता आया था और अब में अनुभव करता हूँ ,
अपने सारे कामो की खातिर मैं हरे नोट जो भरता हूँ .
हर नुक्कड़, हर गली मोहल्ले में ईमान धुआं होकर जलता है,
मेरे साथी मेरे भाई यहाँ तो सिर्फ पैसा ही चलता है.
ये गाँधी का देश है प्यारे , गाँधी के ही नोट चले ,
यहाँ तो पैसे के बल पर भी,बेलेट में है वोट ड़लें.
भ्रष्टाचार के पैसो से यहाँ बच्चा बच्चा पलता है,
मेरे साथी मेरे भाई यहाँ तो सिर्फ पैसा ही चलता है.
यहाँ नकद नारायण के वजन से मामला आगे बढे,
कोई काम करने से पहले भ्रष्टों को ही भेंट चढ़े .
रिज़र्व बैंक की मोहर देखकर सबका दिल फिसलता है,
मेरे साथी मेरे भाई यहाँ तो सिर्फ पैसा ही चलता है.
इधर आगे वही बढेगा जो खाता और खिलाता है,
और अपनों का गला घौन्टकर औरो से हाथ मिलाता है.
यहाँ रिश्वत देते देते आम आदमी जलता है,
मेरे साथी मेरे भाई यहाँ तो सिर्फ पैसा ही चलता है.
No comments:
Post a Comment